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Panchayat Ne Betiyo Ko Liya God

Posted by N.K.TANWAR on September 10, 2012 at 12:35 AM Comments comments (0)


Kendra Me Ek Bhi Dalit Secretary Nahi

Posted by N.K.TANWAR on August 29, 2012 at 4:00 AM Comments comments (1)

नोकरशाही में शीर्ष स्तर पर 3 फीसदी से

भी कम SC/ST का प्रतिनिधित्व ....

ओर ये तब है जब आरक्षण को लागु हुए

62-65 साल हो जायेगे, ये भेदभाव

नहीं तो और किया है ... किया उच्च

पदों पर SC/ST का प्रतिनिधित्व

सुनिश्चित नहीं होना चाहिए ? 


The Greatest Indian

Posted by N.K.TANWAR on August 22, 2012 at 1:15 AM Comments comments (2)


dekh lo aankho m aankh dal dekh lo

Posted by N.K.TANWAR on May 16, 2012 at 12:40 AM Comments comments (5)


How to type in Hindi-?

Posted by N.K.TANWAR on May 3, 2012 at 6:35 AM Comments comments (1)

क्या आपको हिन्दी टायपिंग में दिक्कत आती है? आज इन्टरनेट पर अनेकों साफ्टवेयर उपलब्ध है. मैं हिन्दी में कैफे हिन्दी टाईपिंग टूल (Cafe Hindi Typing Tool) का प्रयोग करता हू. आप भी इसे उपयोग कर सकते हैं.

 

मुझे इस ब्लाग पर अनेकों कमेन्ट यह जानने के लिये आते हैं कि हिन्दी में कैसे टायप करें (How to type in Hindi) या How can i type in HINDI without having a hindi key-board? ?

 

हिन्दी में टायपिंग कैसे करें?

कैफेहिन्दी टायपिंग टूल से हिन्दी में टायपिंग करना एकदम आसान है. यदि आप टायपिंग नहीं जानते तो इसका हिन्दीपैड (HindiPad) ले आउट यानी ट्रांसलिट्रेशन (Translietration) चुनकर सीधे टायप कर सकते ह. इसमें हिन्दुस्तान लिखने के लिये आपको hindustaan और कैफे हिन्दी टाईपिंग टूल (Cafe Hindi Typing Tool) इसे हिन्दी में लिखना होगा आप इसके जरिये बिना रुके अच्छी खासी स्पीड से टायप कर सकते हैं.

 

कैफेहिन्दी टायप टूल में कई कीबोर्ड लेआउट हैं

क्या आप कृतिदेव (Krutidev) या रेमिंग्टन हिन्दी टायपिंग (Remington Hindi Typing) के अभ्यस्त हैं?

यदि आप कृतिदेव फोन्ट्स में टायपिंग करते रहे हैं तो कैफे हिन्दी टाईपिंग टूल (Cafe Hindi Typing Tool) से आप कृतिदेव टायपिंग स्टाइल चुनकर अपनी पुरानी आदत से ही टायपिंग कर सकते हैं.

 

इसके अलावा कैफेहिन्दी टाईपिंग टूल (Cafe Hindi Typing Tool) में इंस्क्रिप्ट और शुषा (Shusha) पद्धति से भी टायपिंग कर सकते हैं.

 

इस सॉफ्टवेयर की कीमत को लेकर आप चिंतित नहीं हों क्योंकि यह आपके लिए बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है. यह विभिन्न वेबसाईटों से मुफ्त उपलब्ध है. आप इसे निम्न लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं. इसका साइज सिर्फ 205 केबी है.


 

Download CafeHindi typing Tool.

 

इसे चलाने के लिए आपके कम्प्यूटर में नेट फ्रेमवर्क2 (Net framework2) होना आवश्यक है. यदि आपके कम्प्यूटर में नेट फ्रेमवर्क2 (Net framework2) नहीं है तो इसे यहां से डाउनलोड कर लीजिये.

 

कैफेहिन्दी टायपिंग टूल (Cafe Hindi Typing Tool) आपको पब्लिकसॉफ्ट और हमारी साइट www.balaisamaj.webs.com की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा हैं

 

तो फिर जल्दी से हिन्दी में लिखना शुरू कीजिये.

Anhkar Kya Hai?

Posted by N.K.TANWAR on January 10, 2012 at 1:25 AM Comments comments (1)

अहंकार क्या है ?

-जब हम में "मैं" पन जाग जाता है। मैं और मेरे विचार, मेरी सोच ही हर जगह सही है, बाकी सब गौण या मूल्यहीन।

** अहंकार होने के कारण-

धन- विद्या- जवानी- कुल- कीर्ति- विजय- संतान-

अहंकार के दुष्परिणाम-

1. अहंकार हमें कर्तव्य पथ से दूर ले जाता है।

2. अहंकार हमें मित्रो से विहीन कर देता है।

3. अहंकार हमारी योग्यता को कुंठित कर देता है।

4. अहंकार हमारे इर्दगिर्द भ्रम का निर्माण कर देता है।

5. अहंकार हमारे शुभ कर्मो का क्षरण कर लेता है।

6. अहंकार हमें नित नयी विपत्तियों में डाल देता है।

7. अहंकार हमें असफलता के नजदीक ले जाता है।

8. अहंकार हमारे विवेक का हरण कर लेता है।

9. अहंकार हमें इष्टमित्रो से दूर कर देता है।

10. अहंकार हमें आलोचना से परिचय करवाता है।

11. अहंकार हमें उद्दंड बना देता है ।

12. अहंकार हमें नकारात्मक बना देता है।

13. अहंकार से अनचाहे संघर्ष उत्पन्न होते हैं।

14. अहंकार से असहयोग को जन्म देता है।

15. अहंकार से दुनिया हमसे नफरत करने लग जाती है।

16. अहंकार के कारण अनुकूल भी प्रतिकूल में बदल जाता है

** अहंकार का त्याग कैसे करे-

1. हमें जो कुछ मिला है वह सामूहिक प्रयत्नों का फल है इसलिए सफलता में कृतज्ञ बने।

2. कर्म के परिणाम अगर अच्छे हैं तो सब में बराबर बाँट दे और बुरे हैं तो स्वयं पर ले

ले।

3. हमें अपने कर्तव्यो का ज्ञान रहे परिणामो पर समय व्यतीत नहीं करे ,उत्सव नहीं

मनाये।

4. स्वयं को निमित्त मात्र माने, यह काम तो होने ही वाला था मगर नियति ने मुझे

गोरवान्वित कर दिया इसलिए नियति की कृतज्ञता प्रगट करे।

5. विनयी बने, विवेकशील बने ।

6. समस्त कर्मो का फल नियति को समर्पित कर दे।

??????? ???????? New Year Resolution ?

Posted by N.K.TANWAR on December 27, 2011 at 1:25 AM Comments comments (0)

अगर आप भी उन करोड़ों लोगों में से हैं जो नए साल पे कोई resolution, promise या प्रण   तो करते हैं पर उसे निभा नहीं पाते हैं तो ये  article  आपकी मदद कर सकता है.

पहली चीज,  आखिर लोग new year resolution लेते क्यों हैं ? शायद खुद में कोई positive बदलाव लाने के लिए, कोई अच्छी आदत डालने के लिए .क्या आपने कभी सुना है कि किसी ने ये resolution लिया हो कि कल से मैं 10 cigarette  और पियूँगा? नहीं सुना होगा ,पर ये ज़रूर सुना होगा कि कल से मुझे cigarette पीना छोड़ना है. यानि new year resolution  का मकसद तो बड़ा नेक होता है. पर सवाल ये उठता है कि आखिर इसे निभाना इतना मुश्किल क्यों होता है?क्यों ज्यादातर लोग अपने resolution  को महीने भर भी नहीं चला पाते हैं ? आज इस article के माध्यम से मैं आपके साथ “New Year Resolution कैसे निभाएं?” पर अपने thoughts share करूँगा :

कभी भी हो सकती है आपके resolutionकि शुरुआत

New Year Resolution कि शुरुआत 1 जनवरी  से ही हो ये ज़रूरी नहीं है. इसलिए  यदि आपने अभी तक कोई resolution न भी लिया हो तो कोई बात नहीं. और यदि आपने साल के शुरू में कोई resolution लिया था और वो एक दिन भी नहीं चल पाया तो भी कोई बात नहीं. जैसे हम पूरे महीने Happy New Year wish  करते रहते हैं उसी तरह हम पूरे महीने कभी भी new year resolution   ले सकते हैं. और यदि resolution लेते लेते पूरी जनवरी निकल जाये तो आप आगे भी resolution  तो ले ही सकते हैं भले ही उसे new year resolution  न कह के simply  resolution  कहिये.

Resolve तभी करें जब सच-मुच आप इसकी ज़रूरत मह्शूश करें

अगर 31st December  को आपके मन में आता है की मुझे कल से office time से पहुचना है या मुझे कल से सुबह walk  पे जाना है और आप ये resolution  ले लेते हैं तो बहुत ज्यादा   chance  है की आपके इस प्रण के प्राण 24 घंटे के अंदर ही निकल जायेंगे.   क्योंकि ये resolution  बिना ज्यादा सोचे-समझे अचानक ही ले लिया गया है.

अब ये कैसे पता चलेगा कि सच-मुच कौन सा resolutionलेने की ज़रूरत है? इसका कोई tried and tested तरीका तो नहीं है पर मैं आपसे वो तरीका share करना चाहूँगा जो मेरे लिए काम करता है.

मुझे जो बाते अपील करती हैं उन्हें मैं पहले एक diary में लिख लेता हूँ.( कभी किसी loose page  पे न लिखें उसके गायब होने में कुछ ही घंटे लगेंगे). अब मैं उन्हें  priority wise list  कर लेता हूँ. और सबसे पहली priority उसी की  होती है जो काम मुझे सबसे ज्यादा खुशी दे. अब मैं उस point को ले के काफी सोचता हूँ और visualize करता हूँ कि ये हो जाने पे कितना मज़ा आएगा …कितना अच्छा  feel  होगा….सच मानिए मैं उसके बारे में इतना ज्यादा सोचता हूँ कि वो काम शुरू हो जाता है. चाहे वो Kartavya (An NGO) की शुरुआत करना हो  या फिर www.balaisamaj.webs.com को start  करना हो..काम होता ज़रूर है. सोच बड़ी चीज है.

तो यदि आपको कोई नयी आदत डालनी या छोड़नी है तो पहले उसके बारे में खूब सोचें.उसको हकीकत बनते सोचें उससे होने वाले फायेदे , मिलने वाली खुशी को सोचें; और अगर वाकई में आप इसको लेकर excited  feel   करते हैं तो फिर ले लें अपना  Resolution.   नहीं तो आगे बढ़ जाएँ..कोई ज़रूरी थोड़ी है की resolutionलिया ही जाये.

अगर इतना सब कुछ करने के बाद आपने resolution लिया है तो यकीन जानिये  आप  already  उन 90%  लोगों कि  category  से निकल चुके हैं जो अपने  resolution  को 10 दिन भी नहीं रख पाते हैं. अब बात आती है कि कैसे इस  resolution  को बनाये रखा जाये.

अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें

आप इस बात से तो agree  करेंगे ही कि किसी बड़े काम को अगर छोटे-छोटे कई कामों में  divide  कर दिया जाये तो उसे करना आसान हो जाता है.

Student life  में मैं  अक्सर पढ़ने के लिए बड़े ही डिजाईनदार  Time-Table  बनाया करता था…..चाहे जो हो जाये कल से रोज 10  घंटे पढ़ना है….इतने बजे से इतने बजे तक Maths, इतने बजे से इतने बजे तक Chemistry, and so on,  पर दो दिन के अंदर उस Time Table का हवाई-जहाज बन जाता था और एक brand new time-table उसकी जगह ले लेता था..पर अफ़सोस इस वाले की भी नाव बन जाती थी. पर जब मैं infinite time की  जगह हफ्ते-हफ्ते भर का time-table बनाने लगा तो मुझे उसे follow करना आसान हो जाता था .

कुछ ऐसी ही trick अपने  resolution  के साथ की जा सकती है. आप अपना resolution इस प्रण के साथ मत शुरू कीजिये कि मैं आज के बाद हमेशा  time से  office  पहुंचूंगा बल्कि  आप कुछ यूँ शुरू कीजिये कि आज के बाद मैं लगातार 21  दिनों तक office time  से पहुंचूंगा. सिर्फ  21  दिनों तक उसके बाद जो होगा देखा जायेगा.  ऐसा करने से आपको ये resolution पहाड नहीं लगेगा और आपका अवचेतन मस्तिष्क इस बात को कहीं आसानी से  accept कर लेगा कि ये  काम doable  है.

अगर आप सोच रहे हैं कि 21  दिन ही क्यों , तो बता दें कि  Researchers  का मानना है कि यदि आपकी किसी काम को अपनी  habit  बनानी है तो कम से कम उसे 21 दिन करना चाहिए , और यदि आप उसे अपनी  personality  का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो 6  महीने तक उसे करें.

21 दिन बाद क्या होगा ?

अगर आपने अपना काम सही ढंग से किया है तो अब तक ये आपकी habit में आ चुका होगा. और अब इसे जरी रखना कहीं आसान होगा.  और यदि ये आपकी habit में नहीं भी आया है तो भी आपने कुछ सफलता तो पायी ही होगी और ये आपको और अधिक सफलता कि तरफ प्रेरित करेगी, success breeds success.  एक  छोटा लक्ष्य  achieve करना आपके confidence  को बढ़ा देगा , अब आप अपना अगला goal  चुन  सकते हैं जैसे कि अगले 42 दिन तक  resolution  निभाने का लक्ष्य. और इस तरह से आप सच-मुच अपने resolution को निभा सकते हैं.

कुछ और Tips  जो मददगार हो सकती हैं :

 अपने resolution को बड़े बड़े अक्षरों में लिख कर अपने सामने रखें. For Example, “For next 21 days   मुझे सुबह Exercise करना है”अपने resolution को कुछ खास लोगों को बताएँ,ऐसा करने पर आप खुद को थोडा answerable मह्शूश करेंगे. और resolution के follow  होने के chances  बढ़ जायेंगे.खुद को माफ करना ज़रूरी है , यदि एक-आध बार आप अपने resolution से विचलित हो जाएँ तो उसे अपनी हार न माने बल्कि आगे और भी दृढ़ता से उसे निभाने का प्रयास करें.और अंत में मैं आप सभी को अपनी तरफ से आने वाले नव वर्ष कि शुभकामनाएं देता हूँ. उम्मीद करता हूँ कि यदि आप कोई  new year resolution  लेंगे  तो उसे कामयाबी के साथ निभा भी पायंगे. All the best.

 

दलित की रोटी ?अछूत? और पैसा का क्या?

Posted by N.K.TANWAR on July 3, 2011 at 8:01 AM Comments comments (0)
?दलित की रोटी खाकर कुत्ता हुआ अछूत?। पिछले दिनों मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के मलिकपुर गांव की यह घटना समाचार पत्रों के माध्यम से पढ़ी। मन बहुत आहत हुआ कि आखिर आज भी कुछ लोग न जाने किस समाज, कौन सी सभ्यता में जी रहे हैं। एक ओर तो हम उन भगवान राम को मानते हैं जिन्होंने शबरी के झूठे बेरों को बड़े चाव से खाया था। भगवान वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को हम रोज बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ते है। उस भारतवर्ष में निवास करते हैं जिस को अंग्रेजों से आजाद कराने वाले महात्मा गांधी ने दलितों की बस्तियों में जा कर उन के साथ खाया पिया, दिन और रातें गुजारी। इन की पत्नी मां कस्तूरबा ने गुजरात के साबरमती आश्रम में लैटरीन साफ की और बापू ने उन्ही हाथों की परोसी रोटियां खाई। हाल ही में कांग्रेस महासचिव और दुनियां के सब से अमीर लोगों में शुमार माइक्रोसाफ्ट के चेयरमैन बिल गेटस अमेठी के शाहगढ़ में राहुल के संग जमीन पर दरी बिछा कर दलितों के संग चैपाल लगाकर बैठे। राहुल और बिल गेट्स ने दलितों और गरीब लोगों के चूल्हे पर बनी कच्ची पक्की रोटियां दलितों के साथ झोंपड़ियों में नीचे जमीन फूस पत्ती पर बैठ कर खाई। दरअसल यह मामला जन सुनवाई में लोगों के सामने तब आया जब एक दलित परिवार चंबल के कलक्टर और डीआईजी के यहां एक काले रंग के शेरू नाम के कुत्ते को लेकर पहंुचा। इस पीड़ित परिवार ने जब अपनी व्यथा सुनाई तो चंबल के कलेक्टर और डीआईजी के होश उड़ गये। पीड़ित परिवार ने उन्हंे बताया कि उन के पड़ोस में एक यादव परिवार रहता है। हम लोग साहब दलित हैं। एक दिन घर में बची एक रोटी मानवता के नाते हमने अपने पड़ोस में रहने वाले यादव परिवार के पालतू कुत्ते को डाल दी जिसे कुत्ते ने खा लिया। हमारी इस बात से कुत्ता स्वामी नाराज हो गया और कहने लगा कि तुमने मेरे कुत्ते को अपने घर की रोटी खिला कर अछूत कर दिया। अब इस कुत्ते को अपने घर ले जाओ और इस के बदले मुझे पन्द्रह हजार रूपये कुत्ते की कीमत अदा करो नहीं तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। पीड़ित दलित परिवार के घर यादव जाति का यह शख्स अपने पालतू कुत्ते को भी बांध गया जिसे यह दलित परिवार अपने साथ लिये था। कलक्टर और डीआईजी ने पीड़ित दलित परिवार की व्यथा सुनकर तुरन्त पुलिस को कार्यवाही के निर्देश दे दिये पर यह पूरी घटना स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा ज्योतिबा फुले, राजा राम मोहन राय, मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी के स्वच्छ समाज में एक ऐसी आग लगा गई, एक लम्बी बहस का मुद्दा छोड़ गई, इंसान और इंसानियत के मुंह पर बहुत जोर का तमाचा मार गई जिस का जख्म और चोट मानवता और इन्सानियत के जिस्म पर बरसों दिखाई और सुनाई देगा। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज भी हमारे देश में दलित बदहाली और छुआछूत के श्राप से मुक्त नहीं हो पाया है। हमारे देश में आज भी कट्टरपंथी लोग तरह तरह से इन का शोषण कर रहे हैं। रूढ़िवाद, अंधविश्वास, छुआछूत ने हमारे देश और समाज को खोखला कर के रख दिया है। हमारे जनप्रतिनिधि संसद भवन और विधान सभाओं में बड़े बड़े वादे और दावे करते हैं। दलितों के नाम की राजनीति कर मंत्राी पद और मुख्यमंत्राी पद पाने में कामयाब हो जाते हैं पर इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि आजादी के 64 साल बाद भी एक दलित के मुकाबले कुछ धार्मिक कट्टरपंथियांे की निगाह में एक कुत्ता ज्यादा पवित्रा है। इस पूरी घटना पर हमारे देश के बुद्विजीवी और सामाजिक संगठन खामोश हैं। क्यों ? आखिर क्या इस घटना पर हमारे समाज की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। यकीनन इस पूरी घटना से आज स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा ज्योतिबा फुले, राजा राममोहन राय, मदन मोहन मालवीय, महात्मा गाँधी, जैसे देश के महान समाज सुधारकों की आत्माएं बहुत दुखी हुई होंगी। सब से पहले मैं उस यादव परिवार से यह पूछना चाहंूगा कि आखिर आज वे कौन सी सदी में जी रहे हैं। मेरा दूसरा सवाल यह है कि दलित परिवार की रोटी अछूत कैसे हो गई क्योंकि आटा बाजार से आया, पानी तालाब या सरकारी हैण्डपम्प का होगा। क्या उस गरीब के छूने भर से आटे और पानी से बनी रोटी अछूत हो गई। चलो, यादव परिवार की सोच से सोचकर मान भी लेते हैं कि वो रोटी अछूत हो गई पर जिन रूपयों की मांग यादव परिवार के मुखिया ने दलित परिवार से की है, क्या वो अछूत नहीं होगें क्योंकि उन रूपयों को तो न जाने कितनी बार इस दलित परिवार ने अपने हाथों में लिया होगा। भगवान का शुक्र अदा करने के लिये हो सकता है चूमा भी हो, अपनी जेब में भी रखा होगा। तब क्या यह पैसा अछूत नहीं होगा। क्या यादव परिवार के मुखिया ने यह भी सोचा है कि जिस प्रकार दलित के घर की एक रोटी खाने के कारण वह अपने पालतू कुत्ते को दलित के घर छोड़ आया, यदि उसने दलित परिवार के हाथों से रूपये लेकर अपने जेब में रख लिये तो क्या वो अछूत नहीं होगा और उस के दिये संस्कारों में पले बढ़े उस के बच्चों ने अगर उसे उस के कुत्ते की तरह अछूत होने पर दलित परिवार के हवाले कर दिया तो क्या होगा। दरअसल पैसा किसी भी सदी में अछूत नहीं रहा। पैसा इन्सान का सब से बड़ा भगवान है। इस पर गरीब और दलित का चाहे कितना ही खून पसीना लगा हो, बड़े से बड़ा पंडित, बड़े से बड़ा कट्टरपंथी इंसानों में फर्क करने वाला इस पैसे को पूजता है। बिना किसी भेदभाव के मंदिर का पुजारी दलित के हाथ से पैसा लेकर भगवान के चरणों में तुरन्त रख देता है। वो दलित के पैसे और सवर्ण जाति के लोगों के पैसों को अलग अलग नही रखता। कोई कोई मंदिर का पुजारी तो लोगों की नजर बचते ही उस पैसे को चुपचाप अपनी अंटी में भी दबा लेता है। हम इन्सान, इंसानों की बनाई रोटी में फर्क कर सकते हैं पर पैसे में फर्क नहीं कर सकते। आज हमारे देश की यह कैसी विडम्बना है कि एक कुत्ते के मुकाबले इंसान को हीन भावना से देखा जा रहा है। भगवान ने जिस इंसान के लिये पूरी दुनियां बनाई, आज वो इंसान जानवर से भी गया गुजरा हो गया, तुच्छ हो गया, अछूत हो गया, केवल इसलिये कि उसने छोटी जाति में जन्म लिया। दलित बना कर उसे मन्दिरों में जाने की इजाजत नही दी जाती। कदम कदम पर उस का शोषण कर उपहास उड़ाया जाता है। आज इस कलयुग में पापी पाखंड रचा कर धर्मात्मा और पुण्यभागी समझे जाने लगे हैं। दलित देश और समाज के लिये खेत खलिहानों में, बड़े बड़े कल कारखानों में, देश की उन्नति में अपना योगदान देने, अपना खून पसीना बहाने के बाद भी कुछ लोगों की निगाहों में आज भी अछूत ही हैं। क्या इस का जवाब कोई राजनेता आज दे सकता है? शायद नहीं क्योंकि उसने तो अभी सिर्फ दलितों के वोटों के बारे में सोचा है। दलितो के बारे में सोचने का उसे अभी वक्त ही नहीं मिला।

Nikmmapan

Posted by N.K.TANWAR on January 3, 2011 at 9:20 AM Comments comments (2)

समाजो की बर्बादी चोर-उचक्कों की करतूतों से नहीं होती ,जितनी की अच्छे लोगो के निक्कमेपन से होती है. कैसा विरोधाभास है अगर अच्छे लोग निकम्मे बनकर बर्बादी सहते है तो वे केसे अच्छे हो सकते है , सवाल यह है की क्या वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारिया निभा रहे है. 

Samaj Ya Desh Ke Charitra ki Pehchan

Posted by N.K.TANWAR on January 3, 2011 at 9:15 AM Comments comments (0)

आप किसी व्यक्ति , समाज या देश के चरित्र की पहचान कैसे कर सकते है ? यह बहुत आसान है ! सिर्फ यह देखिए कि व्यक्ति या समाज इन तिन तरह के लोगो से किस तरह पेश आता है : १. निशक्त/अपाहिज. २. बुजुर्ग. ३. अपने मातहत या जूनियर , सिर्फ इन तिन तरह के लोगो से ही कयो ? क्योकि कि ये लोग अपने अधिकारों के लिए बराबरी में खड़े नहीं हो पाते.

Murkh Kaun

Posted by N.K.TANWAR on January 3, 2011 at 5:58 AM Comments comments (0)

जब तक संसार में एक भी मुर्ख जिन्दा है तब तक कोई भी आमिर भूखा नहीं रहेगा, मेरा इशारा समाज के कमजोर/अशिक्षित वर्ग से है, यानि जब तक शुद्र सम्पूर्ण शिक्षित नहीं हो जाता उसे ये तीनो समुदाय मुर्ख ही समझते रहेगे और अपना पेट भरते रहेंगे. एसा नहीं है की ब्राह्मण,क्षत्रिय,वेश्य इनमे कोई मुर्ख नहीं है इनमे भी भोत मुर्ख है लेकिन शुद्र का अनुपात ज्यादा है . और शिक्षा ही सर्वोतम है.


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